ये जिंदगी है........
आज जब समस्त विश्व कोरोना की महामारी से त्रस्त है , सामाजिक दूरी बनाए रख्नना  राम बाण  की तरह अचूक माना जा  रहा है । चलती फिरती विशाल जीवंत दुनिया  अपने- अपने घर मे सिमट कर रह गई है.ऐसे मुश्किल भरे दौर मे जब करने को कुछ नहीं है तो सच मे करने को बहुत कुछ है। ऐसा ,जिसे करने का,जीवन  की रेल-पेल मे ,आपाधापी मे कभी विचार ही नहीं आया। शायद बहुत कुछ सोचकर ही ईश्वर ने हमें    समय दिया है खुद को जानने और पहचानने का । आत्म विस्मृति  के स्थान पर आत्म अवलोकन का। प्रकृति के  माध्यम से ईश्वर को जानने का,  औरों  की कहानी मे खुद को तलाशने का। औरों के दुःख में डूबकर उसे अनुभव करने का। संसार के चर -अचर जीवों से तादात्म्य स्थापित करने का । सकारात्मक चिंतन के साथ की गई गलतियों  को सुधार कर आगे बढ़ने   का ,जो भूल चुके हैं उसको  याद करने का । इससे ज्यादा सुनहरा  अवसर भला क्या हो सकता  है ,
ऐसे में जीवन की गति भले ही कुछ समय के लिये मंद हो जाए,उसकी लय में  कमी न आने दें  ,उसकी निरंतरता  सदैव बनाए रखें।
चरैवेति चरैवेति........

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