एक छोटा बालक एक छोटा बालक निर्धन , असहाय , कृशकाय | फटे चिथड़े कपड़ो में दुखित शोषण और अन्याय से जैसे समझौता कर चुका हो सूनी - सूनी आंखों में संसार भर की दीनता समेटे चौराहे की रेड लाइट पर खड़ा कुछ पाने की चाह में अपने आश्रय को खोजता उदास आखों से एकटक मेरी ओर देख रहा था| पर वह शायद नहीं जानता कि मै भी हूं उसी की तरह कुछ कर सकने में असमर्थ कुछ पाने में लाचार कुछ कह पाने में बेबस😢😢 मूक आश्रयहीन और एकाकी नितांत एकाकी ........
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👸👸👸👸👸 मम्मी मम्मी मेरी प्यारी मम्मी नई-नई चीजें रोज बनाती है मेरे कहने पर भी लेकिन पिज़्ज़ा नहीं मंगाती है 😎😎😎😎😎😎 पापा पापा मेरे प्यारे पापा राजा बेटा कहके बुलाते हैं मेरे जिद करने पर भी लेकिन आई - फोन नहीं दिलाते हैं 👩👩👩👩👩 टीचर टीचर मेरी प्यारी टीचर प्यार खूब वो करती है नंबर कम आने पर लेकिन मुर्गा मुझे बनाती है |
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💦💦चुन्नू मुन्नू चुन्नू मुन्नू जुड़वां भाई करते रहते सदा लड़ाई कामकाज में मन नहीं लगता न ही करते कभी पढाई दिन भर धमाचौकड़ी करते अम्मी की आफत कर देते इधर उठाना उधर पटकना आसमान सर पर धर लेते चुन्नुजी कुछ सीधे माना मुन्नू जी शैतान के नाना मुन्नू जी जब गड़बड़ करते पकडे जाते चुन्नू भाई कान खींचती उनके मम्मी रोते लेकिन मुन्नू भाई |
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ये जिंदगी है........ आज जब समस्त विश्व कोरोना की महामारी से त्रस्त है , सामाजिक दूरी बनाए रख्नना राम बाण की तरह अचूक माना जा रहा है । चलती फिरती विशाल जीवंत दुनिया अपने- अपने घर मे सिमट कर रह गई है.ऐसे मुश्किल भरे दौर मे जब करने को कुछ नहीं है तो सच मे करने को बहुत कुछ है। ऐसा ,जिसे करने का,जीवन की रेल-पेल मे ,आपाधापी मे कभी विचार ही नहीं आया। शायद बहुत कुछ सोचकर ही ईश्वर ने हमें समय दिया है खुद को जानने और पहचानने का । आत्म विस्मृति के स्थान पर आत्म अवलोकन का। प्रकृति के माध्यम से ईश्वर को जानने का, औरों की कहानी मे खुद को तलाशने का। औरों के दुःख में डूबकर उसे अनुभव करने का। संसार के चर -अचर जीवों से तादात्म्य स्थापित करने का । सकारात्मक चिंतन के साथ की गई गलतियों को सुधार कर आगे बढ़ने का ,जो भूल चुके हैं उसको याद करने का । इससे ज्यादा सुनहरा अवसर भला क्या हो सकता है , ऐसे में जीवन की गति भले ही कुछ समय के लिये मंद हो जाए,उसकी लय में कमी न आने दें ,उसकी निरंतरता सद...
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समीक्षा:वर्तमान संदर्भ में 'संशय की एक रात' /डॉ. नूतन पाण्डेय समीक्षा, Dr. Nootan Pandey, February-2014, Naresh Mehta, Sanshay Ki Ek Raat, साहित्य और संस्कृति की मासिक ई-पत्रिका ' अपनी माटी' ( ISSN 2322-0724 Apni Maati ) फरवरी-2014 चित्रांकन:इरा टाक,जयपुर 'तारसप्तक' के यशस्वी कवि तथा 'उत्सव पुरुष' नरेश मेहता सनातन मूल्यों के पुरोधा तथा वैष्णवी आस्था के कवि के रूप में लब्धप्रतिष्ठ हैं। भारत के दो प्राचीन ऐतिहासिक महाकाव्य रामायण और महाभारत के महत्वपूर्ण विमर्शों को अपनी सृजन- प्रतिभा से युगानुकूल वाणी देने वाले नरेश मेहता ने प्राचीन मिथकों को आधुनिकता की कसौटी पर कसकर उन्हें आधुनिक संदर्भ में अति प्रासंगिक बना दिया है। युगीन राजनैतिक, सामाजिक और मानसिक स्थितियों की अभिव्यक्ति के लिए नरेश मेहता ने पुराण एवं इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं एवं मार्मिक प्रसंगों को आधार बनाकर संशय की ए...